गर तुम्हारी चाहत मे

Today I would like to reproduce one of my poems I wrote back in 2014. This poem often reminds me to take the challenges of the life head on and enjoy it. Whenever, I feel down, this is one of the poems that I go to for my energy refill. I love reading it. I hope you too will. So here it is…

गर तुम्हारी चाहत मे

कोई मुश्किल नही, परेशानी नही है।

जवानी तो है, पर जवानी नही है।।

ज़िंदगी जैसे मिली

उसे वैसे ही स्वीकार किया।

खुद से ज्याद तुमने

अपनी किस्मत पर एतबार किया।

दुनिया को सुनाने को तेरी कोई रोमांचक कहानी नही है।

जवानी तो है, पर जवानी नही है।

कुछ नियम तुमने तोड़ा नही

कुछ नया तुमने जोड़ा नही

अंजाने के डर से तुमने

सुरक्षा घेरे को छोड़ा नही।

गर तुम्हारी आँखों मे

एक सपनों की दुनिया सुहानी नही है।

जवानी तो है पर जवानी नही है।।

उम्र तुम्हारी हुई नही और

बुड्ढों सी बाते करते हो

दूसरो के अनुभवो को सत्य मानकर

कुछ खुद करने से डरते हो॥

और तुम्हारी हरकतों मे

कुछ बच्चो जैसी नादानी नही है।

जवानी तो है, पर जवानी नही है।।

– सतीश ‘कौतूहल ‘

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